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Earth Hour : क्या है और क्यों मनाया जाता है?

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Earth Hour जो हर साल मार्च माह के अंतिम शनिवार को मनाया जाता है। इस वर्ष 28 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। यह एक विशेष अभियान है जिसमें दुनिया भर के लोग 1 घंटे के लिए अपने लाइट्स और अन्य विद्युत उपकरण बंद कर देते हैं। इस दिन लोग बिजली के इस्तेमाल को घटा कर पृथ्वी को बचाने और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए एक सामूहिक संकल्प लिया जाता है, यह जताने के लिए कि हम अपनी पृथ्वी से कितना प्रेम करते हैं।

>> भारत में Earth Hour का समय <<

भारतीय समयानुसार आज यानि 28 मार्च को रात्रि 8:30 बजे से 9:30 बजे तक बिजली उपकरणों को बंद किया जाएगा। पिछले के सालों में राजधानी समेत कई सरकारी संस्थानों व मंदिरों में लाइट बंद करके लोगों ने पृथ्वी के प्रति अपने समर्पण को जताया था।

>> Earth Hour Day का इतिहास <<

यह अभियान 2007 में शुरू हुआ था। सिडनी ऑस्ट्रेलिया में ऑफ यानी वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर के द्वारा और उसे समय से लेकर आज तक के अभियान दुनिया भर में प्रचलित किया जाता है। एक और मूल उद्देश्य पृथ्वी के वातावरण को बचाना है। बिजली के उपयोग को 1 घंटे के लिए बंद करके लोग पृथ्वी की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का संदेश देते हैं। इस दिन को मनाने से लोगों में पृथ्वी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जाते हैं और उन्हें यह बताया जाता है कि छोटी-छोटी कार्यवाही से भी पृथ्वी को बचाया जा सकता है।

Earth Hour Day के अंतर्गत लोगों को बिजली के उपयोग पर विचार करने और इसमें सुधार करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस दिन कई लोग अपने घरों और कार्यालयों में लाइट बंद कर देते हैं, जिससे बिजली का उपयोग कम हो। इसके अलावा कुछ लोग पृथ्वी सुरक्षा संबंधी अभियानों में भाग लेते हैं।

>> Earth Hour का मूल उद्देश्य <<

Earth Hour का मूल उद्देश्य पृथ्वी के लिए एक शांति दूत भावना को बढ़ावा देना है। इसमें लोग एक साथ एकजुट होकर अपनी पृथ्वी की रक्षा के प्रति अपने समर्पण को प्रकट करते हैं। इस दिन को मनाने से लोग एक दूसरे को पृथ्वी के प्रति अपने समर्पण को दर्शाते हैं। इस अभियान में हर साल लोगों की संख्या बढ़ना इस बात का संकेत है कि लोग जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक हो रहे हैं।

साथ ही, इससे यह प्रेरणा मिलती है कि हमारा एक छोटा सा प्रयास, छोटा सा त्याग पृथ्वी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

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