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23 जनवरी 2026 को होगा, चंद्रमा, शनि और नेपच्यून का संयोजन (Conjunction)

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23 जनवरी 2026 को होगा, चंद्रमा, शनि और नेपच्यून का संयोजन (Conjunction)

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 23 जनवरी की रात्रि के आकाश की ओर देखने पर आपको एक शानदार खगोलीय नज़ारा दिखाई देगा। उस दिन मीन (Pisces) तारामंडल में चंद्रमा और शनि ग्रह एक-दूसरे के बहुत क़रीब दिखाई देंगे, जिनके बीच की दूरी लगभग 4°21′ (डिग्री-मिनट) होगी।

उसी समय नेपच्यून ग्रह भी पास में होगा, जिससे ये खगोलीय पिंड लगभग 3°49′ के दायरे में एक साथ दिखाई देंगे। 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस खगोलीय घटना का आकाशीय विवरण निम्न प्रकार घटित होगा उस समय चंद्रमा 5 दिन का बढ़ता हुआ अर्धचंद्र (Waxing Crescent) होगा जो लगभग 26% प्रकाशित दिखाई देगा और उसी दौरान शनि ग्रह भी काफ़ी चमकीला होगा, जिसको साधारण आँखों से आसानी से देख सकते हैं साथ ही खगोलविद अमर पाल सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 

 नेपच्यून ग्रह हमारे सौर मण्डल का सूर्य से दूरी के क्रम में आठवां ग्रह है जोकि सबसे बाह्य ग्रह है एवं इसका मैग्नीट्यूड लगभग +7.8 होता है इस कारण से यह साधारण आंखों से दिखाई नहीं देता है और यह किसी भी छोटी दूरबीन से भी बहुत धुंधला ग्रह दिखाई देता है, इसलिए इसे देखने के लिए किसी अच्छी दूरबीन या टेलीस्कोप की आवश्यकता पड़ती है,

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह एक सुंदर खगोलीय संयोग है और स्टारगेज़िंग और स्टारगेजर्स (तारों को देखने वालों के लिए) तथा एस्ट्रोफोटोग्राफी के लिए बेहतरीन अवसर भी है, लेकिन इस दौरान आकाश साफ़ होना चाहिए एवं प्रकाश प्रदूषण नहीं होना चाहिए तब यह खगोलीय नज़ारा और भी भव्य दिखाई देगा।

किस दिशा में देखें?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह संयोजन आकाश में पश्चिम (West) से थोड़ा दक्षिण-पश्चिम (South-West) के क्षितिज (Horizon) से लगभग 30–35 डिग्री ऊपर नजर आयेगा, और पहले चमकीला शनि दिखेगा उसके पास पतला चंद्रमा दिखाई देगा साथ ही चंद्रमा के थोड़ा नीचे/पास में नेपच्यून (दूरबीन से) दिखेगा , इसको देखने का सबसे अच्छा समय शाम 6:00 बजे से 8:30 बजे तक रहेगा इस दौरान यह अपने चरम पर होगा। इसके बाद संयोजन के बीच की दूरी धीरे धीरे कम होने लगेगी।

हालांकि ये तीनों एक सटीक रेखा में नहीं होंगे, बल्कि शनि और नेपच्यून के करीब चंद्रमा का गुजरना इसे ‘त्रि-संयोजन’ बना सकता है, जो खगोल प्रेमियों के लिए एक खास मौका होगा।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह नज़ारा सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी आकाश में देखा जा सकेगा इस दौरान चंद्रमा और शनि ग्रह के बीच कोणीय दूरी ( एंगुलर सेपरेशन)  कम होगा, इस कारण से दोनों खगोलीय पिंड विनोकुलर फील्ड ऑफ व्यू में ( F O V ) में समा जायेंगे,इस दौरान शनि ग्रह की दृश्य चमक लगभग +1.1 होगी जो इसे एक मध्यम चमक वाले तारे जैसा दिखाएगी, लेकिन यह जोड़ी क्षितिज के नीचे डूबने से पहले कुछ ही समय के लिए दिखाई देगी,

 क्या होता है ‘संयुग्मन’ (Conjunction) ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस प्रकार के संयोजन को युति या कंजंक्शन के रूप में ही मान्यता दी जाती है एवं इसे खगोल विज्ञान की भाषा में इसे ऐपल्स (appulse)  (निकट आगमन ) या ( conjunction) संयोजन और खगोल वैज्ञानिक तथ्य के रूप में यह एक साथ ही ‘संयुग्मन’ (Conjunction) भी कहा जाता है, जो खगोलीय पिंडों के एक ही दिशा में संरेखित होने से बनता है, जिससे वे पृथ्वी से देखने पर पास लगते हैं, भले ही वे वास्तव में लाखों किलोमीटर दूर हों। लेकिन पृथ्वी से देखने पर काफ़ी क़रीब दिखाई देते हैं,

यह ख़ास,चंद्रमा और शनि का अद्भुत मिलन, अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए साल 2026 की शुरुआत में ही बेहद रोमांचक होगा ,जब सौर मंडल का सबसे खूबसूरत ग्रह शनि (Saturn) और पृथ्वी का उपग्रह चंद्रमा एक-दूसरे के बेहद करीब होंगे, अमर पाल सिंह ने बताया कि सूर्यास्त के बाद पश्चिम-दक्षिण पश्चिम दिशा में चंद्रमा और शनि की जोड़ी उभर कर आएगी, हालांकि ये दोनों पिंड आसमान में करीब दिखाई देंगे, लेकिन वास्तव में इनके बीच की भौतिक दूरी करोड़ों किलोमीटर होगी। उन्होंने सलाह देते हुए विशेष वैज्ञानिक टिप्पणी के तौर पर कहा है कि इस दृश्य का आनंद लेने के लिए यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि मौसम भी अनुकूल होना चाहिए, एवं यह केवल एक दृष्टिभ्रम (Line of sight effect) है जिसे खगोल विज्ञान में ‘कंजंक्शन’ कहा जाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि टेलीस्कोप से देखने पर शनि के छल्ले (Rings) और चंद्रमा के क्रेटर्स एक साथ देखना किसी जादुई अनुभव से कम नहीं होगा। सावधानी के लिए खगोलविद ने सुझाव दिया है कि इस घटना को देखने के लिए किसी ऊँचे स्थान या ऐसे मैदान का चुनाव करें जहाँ पश्चिम दिशा का क्षितिज साफ हो और प्रकाश प्रदूषण बहुत ही कम हो।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा को तो आप अपनी साधारण आँखों से साफ़ देख सकते हैं इस दौरान चंद्रमा लगभग 26% रोशनी के साथ प्रकाशित होगा, साथ ही शनि ग्रह को बिना किसी उपकरण के भी देख जा सकता है, लेकिन शनि ग्रह के छल्लों को बिना किसी खगोलीय दूरबीन के नहीं देखा जा सकता है और साथ ही (नेपच्यून ) बरूण ग्रह भी साधारण आंखों से दिखाई नहीं देगा इसको देखने के लिए आपको किसी विनोकुलर 

(Binocular) (10×50) या छोटा टेलीस्कोप ज़रूरी होगा।

निःशुल्क, किन्हीं विशेष खगोलीय जानकारियों हेतु संपर्क सूत्र ।

© खगोलविद अमर पाल सिंह, एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर। 

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत। 🇮🇳 

मोबाइल नंबर+917355546489, ईमेल आईडी amarpal2250@gmail.com

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