वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश,भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस रात चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह एक-दूसरे के बेहद करीब नज़र आएंगे। एवम् बृहस्पति उस समय Gemini (मिथुन राशि/नक्षत्र क्षेत्र) में होगा ओर चंद्रमा उसी path (ecliptic) पर चलते हुए उसके पास पहुंचेगा। तो यह युति ख़ास बनेगी, लेकिन वैसे तो पूरे मार्च में बृहस्पति ग्रह शाम के समय बहुत चमकीला दिखाई देगा।
क्या होता है कंजंक्शन ( युति)।?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि “Conjunction” कंजंक्शन/(युति) का अर्थ है कि जब दो खगोलीय पिंडों के बीच में साधारण तौर से आकाश में बहुत कम कोणीय दूरी (angular separation) पर दिखना होता है,तो इसी को खगोल विज्ञान की भाषा में कंजंक्शन/ (युति ) कहा जाता है। लेकिन यह केवल दृश्य (line-of-sight) का प्रभाव है, और दोनों खगोलीय पिंडो के बीच में वास्तविक दूरी बहुत अधिक रहती है। या कुछ यूं कहें कि यह खगोलीय युति खगोल
वैज्ञानिक तथ्य के हिसाब से एवम् खगोलीय रूप से कोई भी ‘युति’ केवल एक दृष्टिकोण का प्रभाव (Optical Illusion) है। वास्तव में, चंद्रमा, पृथ्वी से लगभग 3,84,400 किमी दूर है, जबकि बृहस्पति ग्रह और पृथ्वी की दूरी सामान्य तौर पर, लगभग 71.4 करोड़ से 75 करोड़ किलोमीटर के बीच होती है, लेकिन युति के दौरान वे केवल हमारे देखने के कोण (Line of Sight) के कारण एक-दूसरे के करीब दिखाई देते हैं। इसको ही खगोल विज्ञान में कंजंक्शन या युति के नाम से जाना जाता है।
क्या होगी दृश्यता और समय ।?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में इसे 26 मार्च 2026 की शाम के समय सूर्यास्त के बाद दक्षिण- पश्चिम दिशा में देखा जा सकता है एवम् शाम लगभग 8:30–9:30 बजे के बीच सबसे अच्छा दृश्य रहेगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान चंद्रमा की चमक का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 11.5 के क़रीब होगा होगा और उसके पास एक बहुत तेज “तारा” जैसा ( लेकिन वह तारा नहीं होता है) बिंदु दिखेगा,वही बृहस्पति ग्रह होगा। इस युति को बिना दूरबीन के भी आसानी से देखा जा सकता है। आप इसे आकाश में अपनी साधारण आंखों से भी देख सकते हैं। लेकिन अगर आपके पास कोई टेलीस्कोप/ दूरबीन है तो आप इस शानदार खगोलीय नज़ारे को और भी अधिक स्पष्ट रूप में देख सकते हैं। साथ ही इस शानदार खगोलीय नज़ारे का भरपूर लुत्फ़ उठाने के लिए एवम् सबसे ज्यादा स्पष्ट तौर से देखने के लिए आपको सावधानी पूर्वक किसी साफ़, स्वच्छ अंधेरी जगह पर जाना चाहिए जहां पर प्रकाश प्रदूषण नहीं हो। या कुछ यूं कहें कि खुले आसमान में जाएं (छत/मैदान) में और शहर की लाइट से थोड़ा दूर रहें। साथ ही अगर दूरबीन हो तो आपको बृहस्पति के 4 चंद्रमा (Galilean moons) भी दिख सकते हैं।अवलोकन के लिए सुझाव के तौर पर खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आप इस युति को नग्न आंखों से भी देख सकते हैं, क्योंकि यह घटना बिना किसी उपकरण के स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। बृहस्पति एक स्थिर, चमकीले सफेद बिंदु की तरह दिखेगा, जबकि चंद्रमा उसके लगभग ठीक ऊपर पास में होगा। यदि आप 7×50 या 10×50 दूरबीन या बिनाकुलर आदि का उपयोग करते हैं,तो बृहस्पति के चार सबसे बड़े चंद्रमाओं (Io) आईओ, (Europa) यूरोपा,( Ganymede) गैनिमीड,और (Callisto) कैलिस्टो को भी देख पाएंगे। इस दौरान चंद्रमा और बृहस्पति के बीच की दूरी लगभग 3 डिग्री 57 आर्कमिनट होगी, जिससे वे दूरबीन/ टेलीस्कोप के एक ही फ्रेम (FOV) में आसानी से फिट हो सकेंगे।
कैसे पहचानें और आकाश में किस तरफ़ देखें।?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह युति मिथुन (Gemini) तारामंडल में आकाश के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में घटित होगी। इस दौरान बृहस्पति ग्रह रात के आकाश में एक स्थिर, चमकते हुए ‘तारे’ की तरह दिखेगा जो टिमटिमाएगा नहीं। साथ ही इस दौरान यह चंद्रमा के ठीक नीचे या पास में बहुत तेज रोशनी बाला पिण्ड होगा जिसका मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 2.5 के साथ दिखाई देगा। साथ ही मिथुन राशि के दो प्रमुख तारों, कैस्टर (Castor) और पुलक्स (Pollux) के पास ही यह युति दिखाई देगी।
कोणीय पृथक्करण (Angular Separation) कितना होगा।?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा, बृहस्पति के उत्तर में लगभग 3°57′ की दूरी से गुजरेगा। हालांकि तकनीकी रूप से यह एक ‘Appulse’ (निकटतम पहुंच) है, इसे सामान्य खगोलीय भाषा में युति कहा जाता है। और इस दौरान चंद्रमा की अवस्था की बात करें तो पाते हैं कि इस दिन चंद्रमा ‘Waxing Gibbous’ (बढ़ता हुआ कुबड़ा चंद्रमा) चरण में होगा, जो लगभग 60% प्रकाशित होगा। एवम् इसकी चमक का मैग्नीट्यूड (Magnitude) लगभग माइनस 11.5 होगा।
साथ ही बृहस्पति की स्थिति को देखें तो पाते हैं कि बृहस्पति लगभग माइनस 2.5 ( Magnitude) मैग्नीट्यूड पर चमक रहा होगा, जिससे यह रात के आकाश में सबसे चमकीली वस्तुओं में से एक बन जाएगा।
कब से कब तक दिखाई देगी यह युति।?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि इसका प्रारंभ शाम लगभग 6 :00 PM (सूर्यास्त के बाद ही) दोनों पिंड आकाश में काफी ऊंचाई पर (लगभग 70°-75°) दक्षिण-पश्चिम दिशा में होंगे।
लेकिन चरम ऊंचाई (Culmination) रात 8:30 PM – 9:30 PM पर होगी। इस समय यह जोड़ी अपने उच्चतम बिंदु पर होगी, अगर आपकी स्थानीय स्थिति के हिसाब से मौसम भी ठीक साफ़ रहा तो अवलोकन के लिए सबसे स्पष्ट दृश्य मिल सकता है।
कितनी देर बाद होगा, इनके अस्त होने का समय।?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आप सूर्यास्त से लेकर लगभग मध्य रात्रि तक इस शानदार खगोलीय युति को देख सकते हैं। लेकिन लगभग रात 12 बजे के बाद से चंद्रमा और बृहस्पति पश्चिमी क्षितिज की ओर नीचे की और जाना शुरू हो जाएंगे।

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©खगोलविद अमर पाल सिंह,
एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश,भारत।
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